Jai Ganga Maiya

गंगा के नैसर्गिक प्रवाह को बांधने से हिमालय की जमीन का विस्थापन बहुत बढ़ा है। जमीन में कटाव, जमाव ही हिमालय की सबसे बड़ी समस्या है। इसका समाधान ही पहली प्राथमिकता बननी चाहिए। हिमालय का कटाव वहां की घास और बांझ, जतीस के मूल पेड़ ही रोक सकते है। इनको हमने बेहरमी से काटा। हिमालय की घास, झांडिया, पेड़ जैसे ही नष्ट हुए। वैसे ही वर्षा जल और पशु चराई, उद्योग, भवन, सड़क और बांध निर्माण से मिट्टी का पलायन बढ़ गया है।

गंगा प्राधिकरण और हिमालय मिशन हमारी भारत सरकार के मुख्य आकर्षण और कार्यक्रम है। इन्हें महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रमों के साथ जोड़कर सफलता पूर्वक सम्पनन्न किया जा सकता है। सबसे पहला काम हिमालय में जंगल, जमीन, जंगली जानवर और जंगलवासी का विस्थापन रोकना अत्यन्त आवश्यक है। आज तक उत्तराखण्ड सरकार का ध्यान अपने सूखते नवले, गिरते हिमालय को पुनर्जीवित करने पर नहीं गया है। अब भी जाये तो अच्छा होगा।

आज की सरकार पांच साल के लिए बनती है। मुख्यमंत्री तो और भी कम समय के लिए बनते हैं। इसीलिए इनकी संरक्षण के साथ विकास वाली दूरदृष्टि नहीं बनती है। इस दूरदृष्टि के बिना गंगा जी अविरल-निर्मल नहीं बन सकती है। भारत सरकार तो अपनी बातचीत में प्रतिबद्ध दिखाई देती है। राज्य सरकार केवल बड़ा बजट और पैसा चाहती है। भारत सरकार भी गंगा हेतु केवल पैसा बांटना ही अपनी जिम्मेदारी समझ बैठी है।